Monday, 28 September 2015

नमस्कार मित्रो,  काफी दिनों के बाद खुद से मुखातिब होने का मौका मिला है।  आजकल के परिवेश में सब से मुश्किल हे अपने लिए वक़्त निकलना और खुद से मुखातिब होना जो की बेहद ज़रूरी है। जब ज़िंदगी में दोस्तों का साथ होता हे तब आपकी खूबी गलतियों से  वो आपको मुखातिब करवाते है लेकिन जब दोस्त दूर हो जाये तो खुद को खुद से मिलना पड़ता हे।

दोस्त, ये शब्द को तन्हाई में सोचना आपकी कल्पना आपकी nursary class तक जाएगी  वो समस्त चेहरे आपके सामने आयेगे जिनसे आपने झगडा तो कभी प्यार ,कभी दुलार किया होगा उस वक़्त आपको ये पता ही नहीं था की वो पल जिंदगी की कितनी हसीं यादो में शुमार होगी और इतने सालो बाद भी आपके चेहेरे पर मीठी सी मुस्कान देगी ।  वो तमाम शरारते आपको अकेले में ठहाके लगाने से रोक नहीं पायेगी जो आपने आपके दोस्तों के साथ की होगी .और एक बार दिल कहेगा ज़रूर

       वो दिन पुराने  फिर आजाये और नहीं आ सकें तो वो पुराना यार आ जाये
उम्र कुछ भी होगई हे आज परवाह नहीं , दिल बच्चा बने और बचपन एक बार आजाये

मैने भी अपने उन तमाम दोस्तों के लिए कुछ लिखा था जो जिंदगी के पड़ावों पर फ़तहे करने दुसरे शहर में बस गए थे अब जिंदगी के पड़ावों पर फ़तहे तो हासिल कर ली पर अब जीवन की नयी जिम्मेदारियों को निभाने में व्यस्त है ईश्वरसे यही प्राथर्ना है की वे तरक्की की और अग्रसर रहे , और जिंदगी के हर मोड़ पर मुलाकातो का सिलसिला चलता रहे---

No comments:

Post a Comment